John David

लेखक

45 की उम्र, 25वीं उपस्थिति: वीनस की वापसी ने न्यूयॉर्क को खड़ा कर दिया

टेनिस में टाइमिंग सब कुछ नहीं, कहानी भी बहुत मायने रखती है। और वीनस विलियम्स की कहानी न्यूयॉर्क में फिर गूंजी। US Open 2025 के लिए USTA ने उन्हें सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स—दोनों में वाइल्ड कार्ड दिया, जिससे यह उनकी टूर्नामेंट की 25वीं मेन ड्रॉ उपस्थिति बनी। 13 अगस्त 2025 को हुई घोषणा में पूर्व सेमीफाइनलिस्ट कैरोलिन गार्सिया का नाम भी शामिल था।

वीनस 2019 के बाद पहली बार US Open के मेन ड्रॉ में उतरीं। बीच के 16 महीनों में उनका कोर्ट से रिश्ता लगभग टूट-सा गया—2024 में यूटेराइन फाइब्रॉइड के लिए सर्जरी और 2011 से चली आ रही शोज़ग्रेन सिंड्रोम की लड़ाई ने उन्हें रोक रखा था। लेकिन अगस्त के शुरू में वॉशिंगटन डीसी के मुबाडाला सिटी ओपन में उन्होंने वाइल्ड कार्ड पर उतरकर अमेरिकी खिलाड़ी पेटन स्टर्न्स को हराया—यह जीत उन्हें 2004 में मार्टिना नवरातिलोवा के बाद WTA मेन-ड्रॉ मैच जीतने वाली सबसे उम्रदराज महिला बना गई।

न्यूयॉर्क में शुरूआत दमदार थी। आर्थर एश स्टेडियम में उन्होंने 11वीं सीड करोलिना मुचोवा के खिलाफ पहला सेट 6-3 से लिया। इस सेट में उनकी सर्विस तेज थी, रिटर्न शार्प और फुटवर्क उतना ही चुस्त जितना दर्शक देखने आए थे। लेकिन मैच का रुख बदला—मुचोवा ने दूसरी सेट में 6-2 से मजबूत वापसी की और निर्णायक सेट 6-1 से अपने नाम किया। स्कोरलाइन 6-3, 2-6, 1-6 रही, पर कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

पोस्ट-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीनस की आंखें भीग गईं। उन्होंने कहा—कोर्ट पर लौटना मेरे लिए इस बात का मौका था कि मैं अपने शरीर के साथ न्याय करूं। जब आप अस्वस्थ खेलते हैं तो सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग भी जकड़ जाता है। आज खुद को थोड़ा आजाद महसूस किया। फिर अपने अंदाज में हंसी—अमेरिका में और टूर्नामेंट क्यों नहीं? कोई एक-दो टूर्नामेंट यहां खिसका दे तो मैं खेलती रहूं।

उनके लिए यह वापसी केवल सिंगल्स तक सीमित नहीं। उन्होंने साफ कहा कि वे मिक्स्ड डबल्स ट्रॉफी को लेकर खास मोटिवेटेड हैं—यह वह बड़ी ट्रॉफी है जिसे उठाने का मौका उनके करियर में अब तक नहीं आया। पार्टनर का नाम अभी छिपा है, पर संकेत साफ हैं—वीनस डबल्स कोर्ट पर अपनी नई योजना के साथ उतरेंगी।

आंकड़े इस दिन को और भारी बनाते हैं। वीनस 1981 के बाद इस टूर्नामेंट में खेलने वाली सबसे उम्रदराज महिला सिंगल्स खिलाड़ी रहीं—रेनी रिचर्ड्स के बाद। ओपन एरा में वे तीसरी सबसे उम्रदराज खिलाड़ी के तौर पर लिस्ट में हैं। मैच खत्म होते ही आर्थर एश स्टेडियम में लंबा स्टैंडिंग ओवेशन हुआ—कई दर्शक मोबाइल कैमरे नीचे रखकर सिर्फ तालियां बजाते रहे। खेल कम्युनिटी के लिए यह इमोशन एक संकेत भी था: उम्र नहीं, इरादा मायने रखता है।

स्वास्थ्य, जज्बा और अगला कदम: वाइल्ड कार्ड के पीछे की सोच

USTA की वाइल्ड कार्ड पॉलिसी अक्सर दो बातों को तवज्जो देती है—खिलाड़ियों की हालिया फॉर्म/संभावना और अमेरिकी फैंस के लिए इवेंट का आकर्षण। वीनस पर दोनों बाते फिट बैठती हैं। एक ओर उनकी वॉशिंगटन वाली जीत उनकी प्रतिस्पर्धा की धार दिखाती है, दूसरी ओर वे अमेरिकी टेनिस का ऐसा चेहरा हैं जो महज उपस्थित होकर भी टिकट की वैल्यू बढ़ा देती हैं।

कैरोलिन गार्सिया का नाम इस सूची में इसलिए भी अहम है क्योंकि वे यूएस ओपन की पूर्व सेमीफाइनलिस्ट हैं। पिछले कुछ समय में उनकी रैंकिंग और नतीजे रोलर-कोस्टर रहे हैं, लेकिन उनकी आक्रामक शैली और हार्ड-कोर्ट पर तेजी से अंक बनाने की क्षमता न्यूयॉर्क की नाइट सेशंस के लिए फिट बैठती है। वाइल्ड कार्ड उनके लिए भी एक नई शुरुआत जैसा है।

वीनस की हेल्थ जर्नी को समझना जरूरी है। शोज़ग्रेन सिंड्रोम एक ऑटोइम्यून कंडीशन है जो थकान और जॉइंट पेन लेकर आती है—एक एथलीट के लिए यह एनर्जी और रिकवरी पर सीधा वार है। 2024 में फाइब्रॉइड सर्जरी ने उनके कैलेंडर को और खिसका दिया। इस बैक-टू-बैक चुनौती के बाद भी उन्होंने ट्रेनिंग मॉड्यूल को ट्यून किया—कम वॉल्यूम, ज्यादा क्वालिटी, कार्डियो की जगह कंट्रोल्ड ऑन-कोर्ट सेशंस और रीकवरी पर सख्त अनुशासन। इसी का असर था कि वॉशिंगटन में वे न सिर्फ खेलीं, जीतीं भी।

कोर्ट पर उनकी टैक्टिक्स भी ध्यान देने लायक रहीं। मुचोवा के खिलाफ पहले सेट में वीनस ने फर्स्ट-सर्व प्रतिशत ऊंचा रखा और दूसरे शॉट पर तेजी से दबाव बनाया। जैसे-जैसे मैच खिंचा, मुचोवा ने रैलियों को लंबा किया और बैकहैंड क्रॉस-कोर्ट से पेस बदला—यहीं से मोमेंटम पलटा। वीनस के लिए यह संकेत है कि सिंगल्स में लंबी रैलियों वाले मैचों के लिए उन्हें मैच-प्ले का और वॉल्यूम चाहिए, जबकि डबल्स में नेट-रश और शॉर्ट पॉइंट पैटर्न उनके पक्ष में जा सकता है।

प्रेस रूम में उनकी एक और बात ठहरी—वे अब ‘पेन-फ्री’ टेनिस को तरजीह देती हैं। इसका मतलब है कि वे शेड्यूल चुनते हुए शरीर की सुनेंगी। यही वजह है कि उन्होंने मजाक में कहा कि अगर और टूर्नामेंट अमेरिका में हों तो वे और खेलें—कम यात्रा, ज्यादा रीकवरी।

उनकी विरासत की बात करें तो वीनस सिर्फ ग्रैंड स्लैम चैंपियन नहीं, बराबरी की लड़ाई का बड़ा चेहरा भी रही हैं। विंबलडन और रोलां गैरो में समान पुरस्कार राशि के लिए उनकी लंबी मुहिम याद की जाती है—आज जो पुरुष और महिला चैंपियंस बराबर चेक उठाते हैं, उसमें उनका निवेश दर्ज है।

टेनिस फैंस के लिए यह वापसी एक तरह से समय की परतें खोलती है। 2000 और 2001 में उन्होंने यहां सिंगल्स ट्रॉफी उठाई थी, फिर सेरीना के साथ डबल्स में सुनहरे अध्याय लिखे, ओलंपिक में गोल्ड्स की झंकार जोड़ी—और अब 45 की उम्र में वे फिर उसी सेंट्रल कोर्ट पर खड़ी हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि आज वे अपना रिद्म, अपनी सीमाएं और अपनी प्राथमिकताएं खुद तय कर रही हैं।

मिक्स्ड डबल्स को लेकर उत्सुकता सबसे ज्यादा है। पार्टनर का नाम सामने आते ही ड्रॉ की तस्वीर बदल सकती है। हार्ड-कोर्ट पर उनके फर्स्ट-स्ट्राइक टेनिस के साथ अगर पार्टनर की सर्विस और नेट-गेम मैच कर जाए तो शॉर्ट पॉइंट्स का खेल उन्हें फायदा दे सकता है। साथ ही, डबल्स में शारीरिक लोड अपेक्षाकृत कम होने से वे पूरे टूर्नामेंट में ताजगी बनाए रख सकती हैं।

इस बीच, वॉशिंगटन की जीत और न्यूयॉर्क की फाइट ने एक साफ संदेश दिया है—वीनस रिटायरमेंट की चर्चाओं से दूर रहना चाहती हैं। वे अगला कदम उसी दिन तय करेंगी जब उन्हें लगेगा कि कोर्ट बुला रहा है। अभी उनके शब्दों में—मैं खेलना चाहती हूं, और जहां खेलना अच्छा लगे, वहीं खेलूंगी।

फैंस, स्पॉन्सर्स और प्रसारण जगत के लिए भी यह अच्छी खबर है। बड़े नाम सिर्फ रेटिंग नहीं लाते, वे नई पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। आर्थर एश पर खड़े होकर तालियां बजाने वाले युवा दर्शक शायद घर लौटकर पहली बार रैकेट उठाएं—खेल की असली जीत यही है।

कैलेंडर की भाषा में देखें तो यह वाइल्ड कार्ड वीनस के लिए ‘वन-ऑफ’ नहीं लगता। यह एक रोडमैप की शुरुआत भी हो सकता है—चयनित इवेंट्स, स्मार्ट डबल्स पार्टनरशिप और शरीर के हिसाब से बना शेड्यूल। न्यूयॉर्क ने फिर साबित कर दिया कि अगर कहानी दमदार हो, तो स्कोरलाइन हेडलाइन नहीं तय करती—खिलाड़ी तय करता है।

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