मनन चक्रवर्ती

लेखक

रायबरेली चुनाव परिणाम पर नजर

राइबरेली लोकसभा सीट पर 2024 के चुनावों की मतगणना जारी है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ एक मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र ने हमेशा से ही राजनीतिक हलकों में बड़ी महत्वता रखी है, विशेषकर इसलिए क्योंकि राहुल गांधी की मां, सोनिया गांधी, ने 2004 से 2019 तक इस सीट पर कब्जा जमाया। सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों से अब राज्यसभा में चली गई हैं।

चुनावी दंगल और मुख्य प्रत्याशी

इस बार राहुल गांधी का मुकाबला बीजेपी के दिनेश प्रताप सिंह और बीएसपी के ठाकुर प्रसाद यादव से है। दोनों ही प्रतिद्वंद्वी भारी प्रचार और रणनीति के साथ मैदान में उतरे हैं, लेकिन अब तक की गिनती में राहुल गांधी ने बढ़त बरकरार रखी है। महत्वपूर्ण है कि राहुल गांधी इस बार केरल की वायनाड सीट से भी मैदान में हैं, ऐसे में उनके लिए यह चुनाव और भी महत्वपूर्ण बन जाता है।

रायबरेली को पारंपरिक तौर पर कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है, जहां गांधी परिवार की दमदार उपस्थिति अक्सर भाजपा और अन्य दलों के लिए चुनौती बन जाती है। ऐसे विशेष राजनीतिक और सामाजिक ताने-बाने में भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह और ठाकुर प्रसाद यादव का मुकाबला किसी महाकाव्य से कम नहीं।

रायबरेली की राजनीतिक इतिहास

रायबरेली की राजनीतिक इतिहास

रायबरेली का राजनीतिक इतिहास कांग्रेस के नाम रहा है। 1971 से लेकर आज तक, इस सीट ने अक्सर कांग्रेस को समर्थन दिया है, विशेषकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी को। यहां की जनता का कांग्रेस के प्रति विश्वास और सहयोग बरकरार है, और इसके पीछे में गांधी परिवार के काम और सेवा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

2024 का मतदान

इस वर्ष के आम चुनावों में रायबरेली सीट पर 58.12% मतदान हुआ जो 2019 के मुकाबले 1.78% अधिक है। यह बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत इस बात का संकेत है कि जनता में इस बार भी राजनैतिक बदलाव और गतिविधियों को लेकर उत्साह है। जनता ने इस बार कांग्रेस को कितना समर्थन दिया है, यह तो आने वाले परिणाम ही बताएंगे, लेकिन राहुल गांधी की बढ़त निश्चित ही उनकी जनप्रियता और पार्टी की मजबूती को दर्शाती है।

भविष्य की उम्मीदें

चाहे परिणाम कुछ भी हो, एक बात तो स्पष्ट है कि रायबरेली का चुनाव न केवल कांग्रेस बल्कि भारतीय राजनीति का भविष्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। गांधी परिवार का यह गढ़ यूं ही नहीं बना, वर्षों की मेहनत और जनता के सहयोग से इसके दीवाने बने हैं। राहुल गांधी का समर्थन बरकरार रहा तो यह फर्क उनके राष्ट्रीय राजनैतिक करियर के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। ऐसे ही मतदान प्रतिशत बढ़ने से यह देखना रोमांचक रहेगा कि कौनसी पार्टी जनता की उम्मीदों पर खरी उतरती है।

फेसबुक पर सांझा करें ट्विटर पर पोस्ट करें लिंक्डइन पर पोस्ट करें Reddit पर पोस्ट करें

एक टिप्पणी लिखें

समान पोस्ट