CBDT क्या है और आपका टैक्स पर इसका क्या असर है

CBDT यानी Central Board of Direct Taxes, भारत में प्रत्यक्ष कर नीति और प्रशासन के लिए उत्तरदायी मुख्य संस्था है। वह आयकर नियम बनाती है, सर्कुलर और नोटिफिकेशन जारी करती है और आयकर विभाग के कामकाज की दिशा तय करती है। इसका असर सीधे आपकी इनकम टैक्स फाइलिंग, रिटर्न प्रोसेसिंग और नोटिस पर दिखता है।

CBDT की मुख्य जिम्मेदारियां

CBDT कर नीति तैयार करता है और नए नियमों की घोषणा करता है। यह टैक्स प्रशासन को मॉडर्न बनाने के लिए डिजिटल पहल भी चलाता है—जैसे फेसलेस असेसमेंट और ई-फाइलिंग प्रक्रियाओं का विस्तार। साथ ही विवाद निपटान के लिए दिशानिर्देश और सरलीकरण के कदम भी यही बोर्ड जारी करता है।

अगर CBDT कोई नया नोटिफिकेशन या स्कीम जारी करता है, तो उसका असर टैक्स रिटर्न दाखिल करने की तारीख, छूटें, या कंप्लायंस नियमों पर दिख सकता है। इसलिए टैक्सपेयर्स के लिए CBDT अपडेट्स का फॉलो करना जरूरी है।

टैक्सपेयर्स के लिए 7 व्यावहारिक सुझाव

1) आधिकारिक स्रोत देखें: CBDT की जानकारी केवल आधिकारिक वेबसाइट और वित्त मंत्रालय के प्रेस रिलीज़ से ही सत्यापित करें। सोशल मीडिया पर अफवाहें फैल सकती हैं, इसलिए पहले स्रोत देखें।

2) ई-फाइलिंग नियमित रखें: रिटर्न समय पर और सही जानकारी के साथ दाखिल करें। गलती होने पर संशोधित रिटर्न देकर सुधार कर लें।

3) नोटिस मिलने पर शांत रहें: नोटिस मिलने पर पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन कर सूचना पढ़ें। जिस यूनिट ने नोटिस भेजा है, उसकी पहचान करें और अगर जरूरत हो तो कर सलाहकार से तुरंत संपर्क करें।

4) दस्तावेज़ संभाल कर रखें: बैंक स्टेटमेंट, निवेश प्रमाण, सेलरी स्लिप और अन्य सहायक दस्तावेज़ कम से कम रिटर्न फाइल करने के पांच साल रखें। ये प्रमाण भविष्य में नोटिस का जवाब देने में काम आएंगे।

5) फेसलेस असेसमेंट का लाभ लें: अगर आपका मामला फेसलेस असेसमेंट के दायरे में आता है, तो दस्तावेज़ ऑनलाइन अपलोड करें और जहां तक संभव हो जवाब ई-प्रोसेस के जरिए दें—इससे पारदर्शिता बढ़ती है।

6) अपडेट्स पर नजर रखें: CBDT के नए सर्कुलर, टैक्स रेट परिवर्तन और निर्देश समय पर चेक करें। छोटे बदलाव भी टैक्स देनदारी या रिफ़ंड पर असर डाल सकते हैं।

7) विशेषज्ञ से सलाह लें: जटिल मामलों, बड़ी कर संरचनाओं या लंबे समय से चल रहे विवाद में पेशेवर कर सलाहकार या CA की मदद लें। गलत जवाब या देरी महंगी पड़ सकती है।

CBDT की नीतियाँ सीधे आपके टैक्स फाइलिंग और नोटिस प्रोसेसिंग को प्रभावित करती हैं। नियम बदलते रहते हैं, पर आसान तरीका यही है—आधिकारिक घोषणाएँ पढ़ते रहना, दस्तावेज़ व्यवस्थित रखना और समय पर जवाब देना। इससे अनावश्यक दिक्कतें कम हो जाती हैं और आप नए नियमों का फायदा उठा पाएंगे।

अधिक जानकारी के लिए CBDT की आधिकारिक वेबसाइट और आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल देखें। अगर किसी नोटिस से कन्फ़्यूज़ हैं तो सीधे कर सलाहकार से बात करें—क्योंकि सही कदम समय पर उठाना ही बचत दिला सकता है।

वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए टैक्स ऑडिट की नियत तिथि 7 दिन बढ़ाई गई 1 अक्तूबर 2024

वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए टैक्स ऑडिट की नियत तिथि 7 दिन बढ़ाई गई

John David 0 टिप्पणि

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दर्ज करने की नियत तिथि 7 दिन बढ़ाई। नए निर्देश के अनुसार, अब यह तिथि 7 अक्टूबर 2024 हो गई है। इस बदलाव का लाभ वे सभी करदाता उठा सकते हैं, जिनकी पहले की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2024 थी।