आत्महत्या: पहचानें, समझें और तुरंत मदद करें
क्या आपने कभी किसी के बोलचाल में ऐसे शब्द सुने हैं जो चिंता जगाते हों? या किसी का व्यवहार अचानक बदल गया हो? आत्महत्या पर बोलना मुश्किल होता है, पर अगर हम समय रहते पहचान लें तो किसी की जान बच सकती है। यह पेज साधारण, सीधे और उपयोगी टिप्स देता है — कैसे पहचानें, कैसे मदद करें और कब प्रोफेशनल सहायता लें।
कौन से संकेत देखें?
कुछ संकेत साफ होते हैं: लगातार उदासी, आशाओं का खत्म होना, दोस्तों और परिवार से दूरी बनाना, काम या पढ़ाई छोड़ देना, झटपट गुस्सा या बेपरवाही, और भविष्य की योजनाओं में दिलचस्पी न होना। कभी-कभी लोग जानते-बूझकर संकेत दे देते हैं—"अब और सहन नहीं होगा" या "सब खत्म कर दूँगा"—ऐसे शब्द को हल्के में न लें।
यदि कोई किसी भी तरह की लगातार नकारात्मक सोच दिखा रहा है, आत्मगुरुत्व कम कर रहा है, या किसी ने हाल ही में बड़ा नुकसान, तलाक, नौकरी छूटना या वित्तीय संकट झेला है, तो जोखिम बढ़ सकता है। बच्चे और बुज़ुर्ग दोनों में व्यवहारिक बदलाव खास ध्यान वाले हैं।
अगर कोई खतरे में हो तो क्या करें?
सबसे पहला काम—चुप न रहें। बात करें। सीधे-सीधे पूछें: "क्या तुम अपने आपको नुकसान पहुंचाने का सोच रहे हो?" यह सवाल पूछना किसी को और अधिक नहीं भड़काता, बल्कि मदद खोलता है। शांत रहकर सुनें, दोष न दें और तुरंत समाधान खोजने की कोशिश न करें—पहले सुनना जरूरी है।
त्वरित कदम जो आप उठा सकते हैं: उस व्यक्ति के पास रहें, अगर संभव हो तो अकेला न छोड़ें; किसी करीबी रिश्तेदार या भरोसेमंद दोस्त को सूचित करें; और अगर स्थिति गंभीर लगे तो तत्काल मेडिकल मदद लें। आप 112 जैसे आपातकालीन नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
प्रोफेशनल मदद लें: मनोचिकित्सक (psychiatrist), क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट या प्रमाणित काउंसलर से संपर्क करें। स्थानीय अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ पूछें। छोटी-छोटी व्यावहारिक बातें—नींद, खानपान और रोज़मर्रा की दिनचर्या पर ध्यान—भी मदद कर सकती हैं, पर गंभीर हालत में केवल डॉक्टर ही उचित दवा और थेरेपी बता सकते हैं।
अगर आप किसी की मदद कर रहे हैं, तो ये न बोलें: "सब ठीक हो जाएगा" (जब तक आप सुनिश्चित न हों), या छोटी-छोटी समस्याओं की तुलना न करें। इसके बजाय कहें: "मैं तुम्हारे साथ हूँ। हम साथ मिलकर मदद ढूंढेंगे।"
याद रखें: आत्महत्या रोकना समुदाय का काम है। थोड़ी सावधानी, बातचीत और सही समय पर पेशेवर मदद से आप किसी की जान बचा सकते हैं। अगर आप खुद मदद चाहते हैं और आशंकित महसूस कर रहे हैं तो तुरंत किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बोलें या नज़दीकी अस्पताल/डॉक्टर से संपर्क करें। आपातकाल में 112 पर कॉल करें।
मालदा समाचार का मकसद है जानकारी और सहारा देना—अगर आपको स्थानीय सहायता की जानकारी चाहिए तो हमसे संपर्क करें या अपने स्थानीय हेल्थ सेंटर से पूछें।
लोकप्रिय कन्नड़ फिल्म निर्देशक गुरु प्रसाद की आत्मा हत्या: व्यक्तिगत और पेशेवर मुश्किलों का संघर्ष
कन्नड़ फिल्म जगत के जाने-माने निर्देशक गुरु प्रसाद की आत्महत्या की ख़बर से इंडस्ट्री में शोक की लहर है। उन्होंने बेंगलुरु के पास अपने घर में अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। उन्होंने कई प्रसिद्ध फिल्मों और टीवी शोज़ में अपने कौशल का प्रदर्शन किया। उनकी आर्थिक समस्याएँ संभवतः उनकी इस निर्णय के पीछे का कारण हो सकती हैं। वे अपनी पत्नी और दो बेटियों को छोड़ गए हैं।