राहु काल: क्या है, कैसे निकालें और कब बचें
राहु काल अक्सर सुनते तो होंगे, पर असल में यह क्या है और रोज़मर्रा में कैसे लागू करें? संक्षेप में: राहु काल हिंदू ज्योतिष के अनुसार दिन का एक समय होता है जिसे खराब माना जाता है। नए काम, शुरुआत, ठोस सौदे या महत्वपूर्ण दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के लिए यह समय अनुकूल नहीं माना जाता।
राहु काल कैसे निकालें — आसान तरीका
सबसे सरल नियम यह है कि दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) को 8 बराबर हिस्सों में बाँटकर हर हिस्से को ध्यान में रखें। हर दिन के लिए राहु काल किसी न किसी हिस्से के बराबर आता है। कदम-दर-कदम तरीका:
1) अपने इलाके का सूर्योदय और सूर्यास्त का समय देखें (मोबाइल या वेबसाइट से)।
2) दिन की कुल अवधि = सूर्यास्त − सूर्योदय।
3) इसे 8 से भाग करें = एक हिस्सा (सेगमेंट)।
4) हर सप्ताह के दिन के लिए राहु काल का हिस्सा याद रखें (नीचे दिया है)।
हफ्ते के दिन और राहु काल का हिस्सा (सामान्य मैप):
सोमवार = 2nd हिस्सा
मंगलवार = 7th हिस्सा
बुधवार = 6th हिस्सा
गुरूवार = 5th हिस्सा
शुक्रवार = 4th हिस्सा
शनिवार = 3rd हिस्सा
रविवार = 8th हिस्सा
उदाहरण: अगर सूर्योदय 6:00 और सूर्यास्त 18:00 है, तो दिन 12 घंटे = 720 मिनट। 720/8 = 90 मिनट। सोमवार का राहु काल 2nd हिस्सा होगा: 7:30–9:00।
कब बचें और क्या करें अगर राहु काल में जरूरी काम पड़ जाए
राहु काल में निम्न काम टालें: नया व्यापार शुरू करना, बड़ा निवेश, शादी के पक्के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर, नौकरी के इंटरव्यू या जरूरी मीटिंग। पर याद रखें—आपातकाल या ज़रूरी काम में कभी भी इंतजार जरूरी नहीं है।
अगर राहु काल में काम आ ही जाए तो क्या करें? कुछ व्यावहारिक सुझाव:
- कोशिश करें काम पूरा या शुरू करने से पहले छोटी पूजा, मन शांत करने वाली साँसें या ध्यान कर लें।
- दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य हो तो समय बदलकर शाम/सुबह किसी सामान्य समय पर कर लें।
- धार्मिक या पारंपरिक उपाय करने के इच्छुक हों तो अपने परिवार या भरोसेमंद ज्योतिष से सलाह लें।
नोट: राहु काल का प्रभाव व्यक्तियों और परिस्तिथियों पर अलग-अलग होता है। तकनीकी या व्यावहारिक रूप से सबसे सरल रास्ता यह है कि आप अपने महत्वपूर्ण कामों का समय रास्ते बदल दें—यानी उस हिस्से से बचें।
अक्सर लोग राहु काल की सही जानकारी के लिए मोबाइल ऐप या लोकल पंचांग देखते हैं — यह सबसे भरोसेमंद और तेज़ तरीका है। छोटे-छोटे कदम जैसे काम का समय बदलना या एक हल्का पूजा-कार्य कर लेना, कई बार मन की शांति देता है और फैसला बेहतर बनता है।
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