माँ चंद्रघंटा — नवरात्रि की तीसरी माता: सरल पूजा और फायदे
माँ चंद्रघंटा नवरात्रि की तीसरी देवी हैं। उनका स्वरूप साहसी और शांत दोनों है — एक तरफ वह युद्ध के लिए तैयार हैं और दूसरी तरफ चंद्रमा की शान्ति बांटती हैं। उनके माथे पर अर्धचंद्र और घंटी जैसा चिह्न होता है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहते हैं।
अगर आप भय, तनाव या घर में नकारात्मकता दूर करना चाहते हैं तो माँ चंद्रघंटा की पूजा बहुत उपयोगी मानी जाती है। ये पूजा मन में हिम्मत बढ़ाती है और निर्णय लेने में मदद करती है।
घर पर आसान पूजा विधि
पौधा, साफ चौकी और माता की छोटी मूर्ति या चित्र रख लें। सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा करें। नीचे दिए आसान कदम उठाएं:
1) स्थान पर घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
2) सफेद या हल्के रंग के फूल, कच्चा चावल, दही, दूध और प्रसाद रखें।
3) संकल्प लें और मन में माता से मदद माँगें।
4) नीचे दिया मंत्र 11 या 108 बार जपें: "ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः"।
5) आरती करें और अंत में प्रसाद बांटें। रोज़ाना दस-पंद्रह मिनट ध्यान और मंत्र जप से भी असर दिखता है।
मंत्र, आरती और हवन के टिप्स
साधारण मंत्र: "ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः" — इसे दिल से बोलें। अगर समय मिले तो चंद्रघंटा स्तोत्र या देवी चाली की छोटी पाठ भी कर सकते हैं।
हवन कराने की स्थिति हो तो चंदन, लौंग, गुड़, चावल और घी लेकर छोटा हवन किया जा सकता है। यह घर की ऊर्जा साफ करता है और मन की शांति बढ़ाता है।
पूजा के दौरान ध्यान रखें: शक्ति की आराधना करते समय नम्रता और श्रद्धा जरूरी है। जल्दी-जल्दी शब्द न बोलें; मन को शान्त रखकर एक-एक मंत्र पढ़ें।
क्या चंद्रघंटा का व्रत करना चाहिए? अगर आप स्थिर मन और साधारण नियम (जय भगवान का ध्यान, सात्विक आहार, अनुशासन) रख सकते हैं तो व्रत फायदेमंद रहता है। व्रत से भय घटता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
छोटी-छोटी साधनाएँ जिनसे फर्क दिखता है:
- हर सुबह थोड़ी देर मंत्र जप या ध्यान।
- घर में साफ-सफाई और दीपक जला कर सकारात्मक माहौल बनाएं।
- अगर मुश्किलें गंभीर हों तो किसी गुरु या मंदिर में विशेष पूजा कराने पर विचार करें।
अंत में, चंद्रघंटा की पूजा पर भरोसा सीधे अनुभव पर टिका होता है — नियमितता और सच्ची श्रद्धा से असर जल्दी मिलता है। आप नवरात्रि के तीसरे दिन या जब भी मन में भय-उत्पीड़न हो, इन सरल उपायों से शुरू कर सकते हैं।
शारदीय नवरात्रि 2024: माँ चंद्रघंटा की पूजा, महत्व और कथा
शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा को समर्पित होता है, जो माँ दुर्गा का तीसरा रूप हैं। इस दिन माँ की पूजा की जाती है, जिसके द्वारा भक्तों को निर्भयता और शांति का वरदान मिलता है। यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।