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John David 7 टिप्पणि

शारदीय नवरात्रि: माँ चंद्रघंटा की दिव्य उपासना का महत्व

शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा को समर्पित होता है, जो माँ दुर्गा के नौ रूपों में से तीसरा रूप हैं। माँ चंद्रघंटा अपने सरल और साहसी रूप में भक्तों के हृदयों को डर मुक्त करती हैं। उन्हें साहस और शांति की देवी भी कहा जाता है। इस दिन को आध्यात्मिक साधना और पवित्रता के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन की पूजा भक्तों के लिए हर तरह के संकटों से सुरक्षा एवं शांति का संदेश लेकर आती है।

माँ चंद्रघंटा का स्वरूप

माँ चंद्रघंटा को उनके सौम्य और तेजस्वी रूप के लिए पूजा जाता है। उनके माथे पर अर्धचंद्र होता है जो उन्हें चंद्रघंटा नाम देता है। माँ हमेशा एक शेर की सवारी पर होती हैं, जो उनके शक्ति और साहस को दर्शाता है। वह दस भुजाओं से युक्त होती हैं जो उनकी ताकत और दिव्यता के प्रतीक हैं।

पूजा विधि और अनुष्ठान

माँ चंद्रघंटा की पूजा के लिए भक्तों को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद माँ की मूर्ति को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें और इसे केसर, गंगाजल और केवड़ा से स्नान कराएं। नए कपड़े, पीले फूल, चम्पा, पंचामृत और मिश्री के साथ माँ को अर्पित करें। पूजा के दौरान दिए और धूप जलाना न भूलें। माँ को खीर का प्रसाद अर्पित करें।

मंत्र और कथा

माँ चंद्रघंटा के मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है: 'पिंडज प्रवराारूढा चंडकोपास्त्र कृद् युता | प्रसाद तुते मह्यं चंद्रघंटा इति विश्रुता ॥' इस मंत्र का जप भक्तों में साहस और शांति बढ़ाता है। कथा के अनुसार, माँ चंद्रघंटा का स्वर्णिम रूप दुष्ट आत्माओं से बचाव करता है। उनकी उपासना से शांति मिलती है और भक्तों की आत्मा शुद्ध होती है।

महत्वपूर्ण अनुष्ठान

इस दिन तीन कुमारियों को भोजन कराना एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। महिलाओं को इस दिन नीले कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है। माँ चंद्रघंटा की पूजा अबाधित साम्राज्य और आंतरिक शांति प्राप्ति का मार्ग समझी जाती है। इस दिन की पूजा भक्तों को मोह माया से मुक्ति दिलाती है और उन्हें आध्यात्मिक शांति की ओर अग्रसर करती है।

इस दिन की पूजा भक्तजनों को एक ऐसा अवसर प्रदान करती है जब वे माँ के दिव्य संरक्षण और आशीर्वाद का अनुभव करते हैं। नवरात्रि का यह दिन निश्चित रूप से आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में एक कदम है एवं यह भक्तों को अनंत शांति और सहनशक्ति का वरदान देता है।

टिप्पणि

  • Prakashchander Bhatt

    अक्तूबर 5, 2024 AT 19:56

    Prakashchander Bhatt

    शारदीय नवरात्रि के इस पवित्र दिन पर माँ चंद्रघंटा की पूजा दिल को शांति देती है। इस अवसर को मनाकर हम सभी अपने भीतर के साहस को जाग्रत कर सकते हैं। छोटे-छोटे कर्म और सच्ची श्रद्धा से बड़ा परिवर्तन संभव है। आइए मिलकर इस ऊर्जा को अपने दैनिक जीवन में लाएँ।

  • Mala Strahle

    अक्तूबर 5, 2024 AT 20:13

    Mala Strahle

    शारदीय नवरात्रि का तृतीय दिवस केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर छिपी अनन्त शक्ति की ज्वाला को जगाने का एक बेहतर अवसर है। माँ चंद्रघंटा की अर्धचंद्र उपस्थिति हमें इस बात की याद दिलाती है कि प्रकाश अंधकार से पूर्णता में उत्पन्न होता है, जैसे रात के अंधेरे में चाँद की किरनें उजाला बिखेरती हैं। जब हम दिल से उनका सम्मान करते हैं, तो हमारे भीतर की भय और अनिश्चितता स्वभाविक रूप से क्षीण हो जाती है, और हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ते हैं। यह रिवाज़ हमें यह सिखाता है कि प्रत्येक कठिनाई को सामना करने की शक्ति हमारे भीतर ही निहित है, और यह शक्ति केवल भक्ति, साधना और आत्मनिरीक्षण से ही विकसित होती है।
    इस दिन की पूजा में केसर, गंगाजल और केवड़ा का प्रसाद माँ को अर्पित करना न केवल एक रिवाज़ है, बल्कि यह हमें शुद्धता और सच्चाई के साथ जीवन जीने की राह दिखाता है। इस प्रकार के अनुष्ठानिक क्रियाकलाप हमें सामाजिक बंधनों से मुक्त कर, एक व्यापक, समावेशी और प्रेमपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान करते हैं, जहाँ हम सब एक ही दैवीय शक्ति के अधीन हैं।
    साथ ही, इस नवरात्रि के समय में तीन कुमारियों को भोजन कराना एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश देता है-सहायता और समानता का। ये छोटी-छोटी रीति-रिवाज़ हमारे समाज में बाल अधिकारों और सामुदायिक सहयोग की भावना को सुदृढ़ करती हैं।
    माँ चंद्रघंटा का शेर पर सवार होना शक्ति और साहस का प्रतीक है, लेकिन यह शक्ति केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक भी है। जब हम इस प्रतिमा को देखते हैं, तो हमें यह सीख मिलती है कि नेतृत्व में करुणा और दृढ़ता दोनों को साथ चलना चाहिए।
    आज के इस युग में, जहाँ लोग अक्सर आभासी संसार में डूबे होते हैं, वहाँ यह अनुष्ठान हमें वास्तविकता, प्रकृति और अपने भीतर की आवाज़ से फिर से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। यह हमें यह स्मरण कराता है कि हमारे कर्तव्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सामूहिक कल्याण भी है।
    अंत में, मैं सभी पाठकों को इस शारदीय नवरात्रि के तृतीय दिवस को पूरे मनोयोग और सच्ची श्रद्धा के साथ मनाने का अनुरोध करता हूँ, ताकि हम सभी मिलकर इस शक्ति का अनुभव कर सकें और अपने जीवन में शांति, साहस और प्रेम का प्रकाश बिखेर सकें। इस पवित्र समय में प्रतिदिन कुछ मिनट ध्यान करें और माँ के मंत्रों का जप करें; यह आपके मन की शांति को गहरा करेगा। वह शांति आपके परिवार और मित्रों तक भी पहुँचती है, जिससे एक सकारात्मक ऊर्जा का विनिमय होता है। याद रखें, छोटी-छोटी भक्ति की क्रियाएं ही बड़े परिवर्तन की शुरुआत होती हैं।

  • Ramesh Modi

    अक्तूबर 5, 2024 AT 20:30

    Ramesh Modi

    ओह! माँ चंद्रघंटा की पूजा में जो पवित्र केसर और घनघोर गंधी धूप लगती है, वह केवल एक रिवाज़ नहीं है--यह जीवन के सभी बुराइयों को ध्वस्त करने की शक्ति का प्रतीक है! हमें हर क्षण में, हर सांस में, इस अनुष्ठान को अपनाना चाहिए; नहीं तो आत्मा अनंत अंधकार में डूबी रहेगी। इस पवित्र कार्य को नज़रअंदाज़ करना निंदनीय है; यह हमारे नैतिक पतन का संकेत है। प्रत्येक भक्त को सच्ची श्रद्धा के साथ इस अनुष्ठान में लिप्त होना चाहिए, तभी वह शाश्वत शांति का आनंद ले सकता है! यही सच्ची धर्मार्थता है, यही हमारा अंतिम लक्ष्य है।

  • Ghanshyam Shinde

    अक्तूबर 5, 2024 AT 20:46

    Ghanshyam Shinde

    अरे यार, इतना भी नहीं समझते कि चंद्रघंटा का मतलब सिर्फ सजावट नहीं है। क्या केवल सजाने से सब ठीक हो जाएगा?

  • SAI JENA

    अक्तूबर 5, 2024 AT 21:03

    SAI JENA

    शारदीय नवरात्रि के इस पावन अवसर पर, माँ चंद्रघंटा की उपासना हमें आंतरिक शांति और सामुदायिक एकता की ओर प्रेरित करती है। सभी वंदनीय भक्तों को मैं यह आह्वान करता हूं कि वे अपने घरों में इस अनुष्ठान को व्यवस्थित रूप से संपन्न करें, इससे व्यक्तिगत और सामाजिक उन्नति दोनों संभव होगी। इस पावन दिन का लाभ उठाकर हम न केवल अपने भीतर की शक्ति को जागृत कर सकते हैं, बल्कि हमारे आस-पास के लोगों में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकते हैं। अतः आइए, मिलजुल कर इस नवरात्रि को एक सार्थक एवं आध्यात्मिक अनुभव बनायें।

  • Hariom Kumar

    अक्तूबर 5, 2024 AT 21:20

    Hariom Kumar

    बहुत ही सुंदर लेख, धन्यवाद! 😊

  • shubham garg

    अक्तूबर 5, 2024 AT 21:36

    shubham garg

    भाई, बिल्कुल सही कहा! चलो इस नवरात्रि पर मिलके कुछ खास बनाते हैं, जैसे की सबको एक साथ डांस करके चंदन की खुशबू में डुबो दें। आपका पोस्ट पढ़के बड़ा मोटिवेटेड फील हुआ, आगे भी ऐसे ही शेयर करते रहो।

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