पंचांग — आज की तिथि, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त
क्या आपको रोज़ के कामों के लिए सही दिन और समय चुनना है? पंचांग वही साधन है जो तिथि, नक्षत्र, योग और करण जैसे गणितीय और खगोलीय संकेत बताता है। मालदा समाचार के इस टैग पेज पर हम सरल भाषा में बताते हैं कि पंचांग कैसे पढ़ें, किस काम के लिए क्या देखना चाहिए और लोकल टाइमिंग क्यों ज़रूरी है।
पंचांग के मुख्य हिस्से और उनका मतलब
पंचांग में आम तौर पर ये पांच बातें दी होती हैं: तिथि (चंद्र का दिन), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्र की स्थिति), योग और करण। तिथि बताती है कि चंद्रमा किस चरण में है — जैसे प्रतिपदा, पूर्णिमा या अमावस्या। नक्षत्र 27 भागों में से कौन सा है यह बताता है कि भावनात्मक या कार्य-संबंधी कैसी स्थितियाँ बनेंगी। योग और करण धार्मिक नियमों और मुहूर्त के लिए काम आते हैं।
इसके अलावा समय-सूचक जैसे सूर्योदय और सूर्यास्त, राहुकाल, गुलिक काल और अभिजित मुहूर्त भी दिए होते हैं। राहुकाल व्यापारिक कामों के लिए अक्सर अवांछित माना जाता है; वही अभिजित कुछ शुभ कामों के लिए छोटा सा अच्छा वक्त देता है।
पंचांग कैसे पढ़ें — आसान तरीके
1) पहले अपने शहर का लोकल sunrise/sunset देखें — यही आधार होगा। मालदा या आपके नज़दीकी शहर के समय के अनुसार तिथि और मुहूर्त बदलते हैं।
2) यदि आप विवाह या उद्घाटन का समय चुन रहे हैं तो नक्षत्र और तिथि को प्राथमिकता दें। शुभ नक्षत्र और शुक्ल पक्ष की तिथियाँ अक्सर बेहतर मानी जाती हैं।
3) छोटी पूजा, यात्रा या मेडिकल ऑपरेशन जैसे कामों के लिए राहुकाल और गुलिक से बचें। सुबह के कुछ घंटे और शाम के शुभ घंटे (सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले) सामान्यतः बेहतर होते हैं।
4) व्रत और त्यौहार के लिए तिथि और अवधि ध्यान से देखें — कई व्रत सूर्यास्त से एक दिन पहले या बाद में शुरू/खत्म होते हैं।
अगर आपको पंचांग पढ़ने में समय नहीं है तो भरोसेमंद लोकल पंचांग या मोबाइल ऐप में अपना शहर सेट करें। बस याद रखें: पंचांग का सही प्रयोग स्थानीय समय के साथ ही होता है।
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