एंजल टैक्स: स्टार्टअप के लिए क्या है और कैसे बचें

क्या आपकी कंपनी को निवेश के बाद 'एंजल टैक्स' नोटिस मिला? चिंता मत कीजिए — यह आम परेशानी है और इससे निपटने के साफ तरीके हैं। यहाँ सरल भाषा में बताता हूँ कि एंजल टैक्स क्या होता है, कब आता है और आप क्या कर सकते हैं।

एंजल टैक्स आमतौर पर तब लगता है जब किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को रेजिडेंट निवेशक से शेयर प्रीमियम के रूप में वह राशि मिलती है जो उसकी फेयर वैल्यू से अधिक मानी जाती है। इनकम टैक्स विभाग इस अतिरिक्त को किसी काॅन्सिडरैशन के रूप में देखकर टैक्स योग्य आय मान सकता है। स्टार्टअप्स के लिए यह बड़ा सिरदर्द बन सकता है, खासकर जब वैल्यूएशन की वजह से नोटिस आता है।

किसे प्रभावित करता है और कौन छूट पा सकता है?

इन्हें प्रभावित होने की ज्यादा सम्भावना रहती है: शुरुआती राउंड में लोअर ट्रैक रिकॉर्ड वाली कंपनियाँ, जिनकी वैल्यूएशन पर स्टैंडर्ड प्रैक्टिस नहीं रही; और वे फाउंडर्स जिनके पास पर्याप्त डॉक्यूमेंटेशन नहीं है। जैसे ही आप DPIIT (अब Department for Promotion of Industry and Internal Trade) से स्टार्टअप सर्टिफिकेट लेते हैं, कुछ मामलों में सहूलियत मिलती है — पर एक्सेम्प्शन हमेशा स्वतः नहीं मिलता।

छूट पाने के लिए अक्सर आवश्यक होता है कि कंपनी DPIIT से स्टार्टअप सर्टिफिकेट हो और निवेश सिद्ध करने के लिए कागजात पूरे हों। फिर भी, कर अधिकारी वैल्यूएशन और निवेश के स्रोत को देखेंगे।

फैसला करने के आसान कदम और जरूरी डॉक्यूमेंट

पहला काम: पूरी फाइल तैयार रखें। इसमें शामिल करें — शेयर सब्सक्रिप्शन एग्रीमेंट, निवेशक की KYC और PAN, बैंक स्टेटमेंट, वैल्यूएशन रिपोर्ट (रजिस्टर्ड वैल्यूअर से), बोर्ड रेज़ॉल्यूशन, कैप टेबल और DPIIT सर्टिफिकेट अगर मिले हों।

दूसरा: वैल्यूएशन प्रोसेस साफ रखें। निवेश से पहले वैल्यूएशन रिपोर्ट बनवाएँ। यह नोटिस मिलने पर सबसे मजबूत रक्षा होती है।

तीसरा: नोटिस मिलने पर तुरंत जवाब दें — टालना नुकसानदेह होता है। आयकर अधिकारी को व्यवस्थित डॉक्यूमेंट दें और स्पष्टीकरण रखें। जरूरत पड़े तो कर वकील या CA से मदद लें।

अगर विभाग ने इसे टैक्सेबल माना है तो आप पटवारी के सामने दलील रख सकते हैं, रिव्यू/अपील के विकल्प होते हैं — पहले AO से बातचीत, फिर अपीलीय फोरम और कोर्ट तक। प्रोफेशनल मदद लेने से केस जल्दी सॉल्व हो सकता है।

एक छोटा चेकलिस्ट: 1) DPIIT रजिस्ट्रेशन, 2) रजिस्टर्ड वैल्यूअर की रिपोर्ट, 3) पूरा निवेश डॉक्यूमेंटेशन, 4) निवेशक की KYC और सोर्स ऑफ़ फंड, 5) शेयर अलॉटमेंट रिकॉर्ड। ये पांच चीजें अक्सर नोटिस रोकने या कमजोर करने में सबसे मददगार रहती हैं।

अंत में, अपनी वैल्यूएशन पॉलिसी और निवेश प्रक्रिया को साफ और रिकॉर्डेड रखें। इससे भविष्य के नोटिस कम आएँगे और एंजल निवेशक भी भरोसा करेंगे। अगर चाहिए तो आप प्रोफेशनल टैक्स एडवाइज़री से पहले से ही रणनीति बनवा लें।

किसी खास केस पर मदद चाहिए? अपने डॉक्यूमेंट्स देखकर मैं आसान भाषा में आगे सुझाव दे सकता हूँ।

भारत में 'एंजल टैक्स' की समाप्ति: स्टार्टअप्स और निवेशक उत्साहित 23 जुलाई 2024

भारत में 'एंजल टैक्स' की समाप्ति: स्टार्टअप्स और निवेशक उत्साहित

John David 0 टिप्पणि

भारत ने निवेशकों पर लगने वाले 'एंजल टैक्स' को समाप्त कर दिया है, जिससे स्टार्टअप्स में नवाचार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस कदम से निवेशकों और उद्यमियों को आकर्षित करने में सहायता मिलेगी, जिससे अधिक रोजगार और आर्थिक अवसर उत्पन्न होंगे। यह निर्णय देश में उद्यमिता और नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है।