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सात साल बाद भी वह विवाद हवा में है। रविचंद्रन अश्विन, पूर्व भारतीय स्पिनर ने 3 मई 2026 को एक बार फिर उस घटना को ताजा कर दिया जिसके लिए उन्हें 'मंक्डिंग' (Mankading) का आरोप लगाया गया था। अपने नए शो में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने जोस बटलर को आउट करने में कोई गलती नहीं की थी और न ही उनके चरित्र पर सवाल उठाने की गुंजाइश है।

यह बयान JioStar के शो "The Ravichandran Ashwin Experience" में दिए गए, जहां अश्विन ने 2019 के Indian Premier League (IPL) के उस मैच की याद ताज़ा की जब वे कप्तानी करते थे। उनका तर्क साफ़ था: अगर यह ईमानदारी का मुद्दा होता, तो International Cricket Council (ICC) इसे नियमों से क्यों नहीं हटाता?

अश्विन का बचाव: यह 'स्मार्ट क्रिकेट' था

अश्विन ने शो में जो कहानी सुनाई, वह सीधी और बिना फिल्टर वाली थी। उन्होंने बताया कि कई लोग कहते हैं कि यह काम गलत है, लेकिन यही बात उन्हें ऐसा करने के लिए और अधिक प्रेरित करती थी। "लोग कहते हैं कि यह गलत है, इसलिए मैंने ऐसा नहीं किया? नहीं, मैंने इसे जीतने के लिए किया," अश्विन ने कहा। "मुझसे पूछा जाता है कि क्या आपने यह खेल जीतने के लिए किया? हाँ, बिल्कुल। इसमें शर्मिंदगी की क्या बात है?"

वे एक ऐसी स्थिति का उदाहरण देते हैं जहाँ उनकी टीम को दो रन चाहिए थे। "मैं एक्स्ट्रा कवर पर था और बॉलर से कहा कि उसे नॉन-स्ट्राइकर एंड पर रन आउट करो। बैटर भागा, लेकिन बॉलर ने मन कर दिया क्योंकि लोग कहते हैं कि यह गलत है।" अश्विन का मानना है कि यह 'स्मार्ट क्रिकेट' है, न कि चरित्र की कमी।

2019 का वह दिन: जब जयपुर में तूफान आया

आइए वापस IPL 2019 Match between Kings XI Punjab and Rajasthan RoyalsJaipur जाएं। उस दिन, Kings XI Punjab (अब पंजाब किंग्स) के कप्तान अश्विन ने देखा कि Rajasthan Royals के स्टार ओपनर जोस बटलर अपनी क्रीज से काफी बाहर निकल चुके थे। जैसे ही अश्विन डिलीवरी के लिए दौड़े, बटलर क्रीज के बाहर थे। अश्विन ने रुककर विकेट उठा लिया।

मैदान पर तुरंत गर्मागर्मी हो गई। बटलर नाराज दिखे और दोनों टीमों के बीच तीखी बहस हुई। हालांकि, नियमों के अनुसार यह डिस्मिसल वैध था। उस समय Marylebone Cricket Club (MCC) ने कहा था कि हालांकि यह नियमों के दायरे में था, लेकिन यह 'स्पिरिट ऑफ द गेम' (Spirit of the Game) के अनुरूप नहीं लग रहा था। MCC का मानना था कि अश्विन ने जानबूझकर ठहराव लिया था।

बटलर और MCC की प्रतिक्रिया

जोस बटलर ने उस समय स्काई स्पोर्ट्स को बताया था कि उन्हें यह आउट होना पसंद नहीं आया, लेकिन उन्होंने कहा, "अब सब कुछ हो चुका है और मैं आगे बढ़ चुका हूं।" बाद में, cricket.com.au के साथ एक इंटरव्यू में, बटलर ने पुष्टि की कि उन्होंने रिप्ले देखा और उन्हें लगा कि उन्हें आउट नहीं होना चाहिए था, लेकिन उन्होंने मामले को वहीं छोड़ दिया।

MCC ने मार्च 2019 में अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि यदि अश्विन डिलीवरी की स्थिति में आ गए होते, तो बटलर को उम्मीद थी कि गेंद आएगी। अश्विन का रुकना और फिर विकेट उठाना MCC के लिए 'बहुत लंबा ठहराव' था, जिसे उन्होंने खेल की भावना के विपरीत माना।

अश्विन का IPL सफर और निराशा

इस वार्तालाप के दौरान, अश्विन ने अपने Indian Premier League करियर के आंकड़ों पर भी रोशनी डाली। 2009 से 2025 तक, उन्होंने पांच अलग-अलग फ्रanchise के लिए कुल 221 मैच खेले और 187 विकेट लिए। उन्होंने 2018 और 2019 में पंजाब किंग्स की कप्तानी की, लेकिन वे खुलकर मानते हैं कि वे उस फ्रanchise को 'अपना' नहीं बना सके। "जब पंजाब ने मुझे 2018 में चुना, तो मुझे लगा कि मैं आगे बढ़ रहा हूं... मैंने दो साल वहां बिताए और ईमानदारी से सब कुछ दिया," उन्होंने कहा। इसके विपरीत, उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के साथ अपने समय को सबसे संतोषजनक बताया।

भविष्य क्या है?

अश्विन के ये बयान फिर से उस बहस को जगा रहे हैं कि क्या क्रिकेट में 'नियम' और 'भावना' के बीच कोई समझौता संभव है। 2020 में ढाका ट्राइब्यून ने रिपोर्ट की थी कि अश्विन ने ऐसे बल्लेबाजों के खिलाफ नए दंडों की मांग की थी जो बहुत आगे निकलकर दौड़ लगाते हैं। आज, सात साल बाद, अश्विन का रुख वही है: "मैंने चोरी नहीं की, मैंने कुछ गलत नहीं किया, मैंने नियमों के भीतर खेल किया।"

Frequently Asked Questions

हाँ, मंक्डिंग पूरी तरह से वैध है। क्रिकेट के नियमों (Law 41.16) के अनुसार, यदि गेंदबाजी शुरू होने से पहले नॉन-स्ट्राइकर क्रीज से बाहर निकल जाता है, तो गेंदबाज विकेट उठा सकता है। ICC इसे एक वैध तरीका मानता है, भले ही इस पर 'स्पिरिट ऑफ द गेम' के सवाल उठते रहें।

MCC ने कहा था कि हालांकि यह डिस्मिसल नियमों के दायरे में था, लेकिन यह 'स्पिरिट ऑफ द गेम' के अनुरूप नहीं था। उनका मानना था कि अश्विन ने जानबूझकर एक लंबा ठहराव लिया था ताकि बटलर क्रीज से बाहर निकलें, जो कि खेल की भावना के विपरीत था।

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