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John David 20 टिप्पणि
In भारत में 13 अक्टूबर 2025 को मनाई जाने वाली आहॉई अष्टमीभारत का वैधु समय आज शाम 05:53 से 07:08 बजे IST है, जिसमें माताएँ अपने बच्चों की कल्याण की कामना में कठोर उपवास रखती हैं। यह पर्व आहॉई माता को समर्पित है, जो बच्चों के सुरक्षा दायित्व की प्रतीक मानी जाती हैं। यह त्यौहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर आता है, जब शरद ऋतु का माहौल हल्की ठंडक और दीपों की तैयारियों से भर जाता है। परम्परागत रूप से यह व्रत केवल पुत्र के लिए रखा जाता था, पर आज की कई घरों में बच्चों के सभी लिंग के लिये उपवास किया जाता है, जो समकालीन समानता की प्रवृत्ति को दर्शाता है। 2025 में अनुमानित 1.2 करोड़ महिलाएँ इस दिन व्रत रखती हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे उत्तर भारतीय राज्यों में सबसे अधिक हिस्सा है। इस संख्या में पिछले साल से लगभग 7 % की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आहॉई अष्टमी का सामाजिक प्रभाव बढ़ रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आध्यात्मिक महत्व

आहॉई अष्टमी का उद्गम प्राचीन पौराणिक ग्रंथों में मिलता है, जहाँ कथा है कि एक माँ ने अपने नवजात शिशु को बचाने के लिये रात्रि तक जल नहीं पी कर व्रत रखा और माँ की पुकार सुनकर आहॉई माता ने शिशु को बचा लिया। यह घटना मातृ भाव की शक्ति को दर्शाती है और साथ ही माता‑पुत्र (या माता‑पुत्री) के बीच के अडिग बंधन को सुदृढ़ करती है। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य बच्चे के भविष्य की रक्षा, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना है।

व्रत का त्यौहारी समय‑सारिणी 2025

  • सूर्योदय पर व्रत प्रारम्भ – लगभग 06:12 AM
  • पूरे दिन जल व भोजन का परित्याग – दिन भर
  • वैधु समय (पूजा का सर्वोत्तम समय) – 05:53 PM से 07:08 PM IST (१ घंटा १५ मिनट)
  • व्रत समाप्ति – तारा दृष्टि के बाद लगभग 06:17 PM IST
ध्यान रखें कि तारा दिखाई देने का समय स्थान‑अनुसार 5‑10 मिनट तक बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समायोजन आवश्यक है। पूजा विधि और प्रमुख अनुष्ठान

पूजा विधि और प्रमुख अनुष्ठान

पूजा की शुरुआत घर की मुख्य दालान में सफेद कपड़े बिछाकर की जाती है। माँ अपने हाथ धोती है, फिर आहॉई माता की मूर्ति या चित्र के सामने चंदन और हल्दी लगा कर अभिषेक करती है। फिर चार ताबे (गुड़, चावल, काबुली चने और नारियल) को सात कपड़ों में रखकर अर्पित किया जाता है। अंत में 108 बार उत्तरनारी मंत्र का जप किया जाता है। इस अनुष्ठान के बाद वैधु समय के भीतर दीप जलाकर प्रार्थना की जाती है।

“मैं हर साल इस व्रत को पूरी निष्ठा से रखती हूँ, क्योंकि आहॉई माता का आशिर्वाद मेरे बच्चों की पढ़ाई में दिखता है,” बताती हैं शैलजा वर्मा, नई दिल्ली की एक गृहिणी। उन्होंने कहा कि यह व्रत उन्हें मन के शांति और परिवारिक सौहार्द का अहसास कराता है।

समकालीन समझ और सामाजिक प्रभाव

पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर आहॉई अष्टमी का कवरेज तीव्रता से बढ़ा है। इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर #AhoiAshtami के तहत 2 मिलियन से अधिक पोस्ट देखी गई हैं। युवा माताओं ने व्रत के दौरान पोषण संबंधी सुझाव, जैसे कि उपवास के दौरान हल्के फलों का सेवन, साझा किया है, जिससे स्वास्थ्य‑सुरक्षा की नई धारा झलकती है। साथ ही, कई NGOs ने इस अवसर को लेकर बाल स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए, जिसमें पोषण पर जागरूकता और टीकाकरण के बारे में जानकारी दी गई। भविष्य की प्रवृत्तियाँ और विशेषज्ञ दृष्टिकोण

भविष्य की प्रवृत्तियाँ और विशेषज्ञ दृष्टिकोण

डॉ. विष्णु राव, इतिहास एवं समाजशास्त्र के प्रोफ़ेसर, कहते हैं, “आहॉई अष्टमी परम्परा में लिंग‑समता की दिशा में एक स्पष्ट बदलाव देखा जा रहा है। जहाँ पहले केवल पुत्र को ही सुरक्षित माना जाता था, अब सभी बच्चों को समान रूप से संरक्षित करने की भावना प्रमुख है।” उन्होंने आगे कहा कि यदि इस प्रवृत्ति जारी रही तो आगामी दशकों में इस व्रत को राष्ट्रीय स्तर पर एक समग्र मातृ‑सुरक्षा दिवस के रूप में भी मान्यता मिल सकती है। साथ ही, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो उपवास के दौरान शरीर में डिटॉक्सिफिकेशन प्रभाव हो सकता है, परंतु दीर्घकालिक उपवास के जोखिमों को देखते हुए मेडिकल सलाह लेना आवश्यक है। इस कारण, कई स्वास्थ्य संस्थान ने इस वर्ष व्रत रखती महिलाओं के लिए हल्के आहार विकल्पों की सिफ़ारिश की है।
  • Key Facts
    • तारीख: 13 अक्टूबर 2025 (कार्तिक माह कृष्ण अष्टमी)
    • वैधु समय: 05:53 PM – 07:08 PM IST
    • व्रत समाप्ति: लगभग 06:17 PM IST (तारा‑दृष्टि)
    • प्रमुख अनुष्ठान: चंदन‑अभिषेक, 108‑मंत्र जप, दीप‑पूजा
    • उपस्थित माताएँ: अनुमानित 1.2 crore (2025)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आहॉई अष्टमी से कौन‑से समूह सबसे अधिक प्रभावित होते हैं?

मुख्यतः माताओं और उनके बच्चों का समूह इस पर्व से सबसे अधिक प्रभावित होता है, क्योंकि यह व्रत और पूजा मातृ‑सुरक्षा पर केंद्रित है। साथ ही, उत्तर भारत के ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में इस दिन घर‑परिवार के मिलन‑समारोह होते हैं।

व्रत का सही समय कैसे निर्धारित किया जाता है?

व्रत का प्रारम्भ सूर्योदय के समय होता है, जबकि समाप्ति तारा दृश्यमान होने पर तय होती है। पंचांग में दर्शाए गए वैधु समय (05:53 PM – 07:08 PM) को सबसे अनुकूल माना जाता है, क्योंकि इस अवधि में रात्रि‑तारा की पहली झलक मिलती है।

क्या इस वर्ष व्रत में कोई विशेष बदलाव है?

2025 में व्रत की अवधि पहले की तुलना में 15 मिनट अधिक है, क्योंकि आयुर्विज्ञान की सलाह के अनुसार कई महिलाएँ हल्के पोषक तत्वों को शामिल कर रही हैं। साथ ही, इस साल कई राज्यों में बच्चों के स्वास्थ्य शिविर और आहॉई मां के नाम पर दान कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

आहॉई अष्टमी का दीवाली और करवा चौथ से क्या संबंध है?

आहॉई अष्टमी करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद पड़ती है और दीवाली से लगभग आठ दिन पहले आती है। इन तीनों पर्वों का सामान्य मोड़ यह है कि सभी माँ‑बच्चे के बंधन, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना को दर्शाते हैं, इसलिए अक्सर इनका सामूहिक रूप से उल्लेख किया जाता है।

व्रत समाप्ति के बाद कौन‑से पारम्परिक पकवान बनाए जाते हैं?

व्रत तोड़ने के बाद अक्सर अळू व सैंफेद (सुनहली) के साथ मीठी खीर, काली दाल और चपाती परोसी जाती है। कुछ परिवार में हलके फलों की सलाद और नारियल पानी भी तैयार किया जाता है, जिससे उपवास के बाद शरीर को ऊर्जा मिलती है।

टिप्पणि

  • Naman Patidar

    अक्तूबर 14, 2025 AT 00:12

    Naman Patidar

    अहा, फिर से वही पुरानी व्रत की बातें।

  • Vinay Bhushan

    अक्तूबर 17, 2025 AT 11:33

    Vinay Bhushan

    आहॉई अष्टमी का वैधु समय सच में परिवार के लिए बहुत 의미पूर्ण है, यह ऊर्जा का स्रोत बनता है और माताओं को अपने बच्चों के लिए शक्ति मिलती है। साथ‑साथ इस समय का पालीना हमें एकजुट भी करता है, इसलिए इसे पूरे मन से अपनाएँ और सकारात्मक सोच रखें।

  • Parth Kaushal

    अक्तूबर 20, 2025 AT 22:53

    Parth Kaushal

    आहॉई अष्टमी का इतिहास गहरा है और यह हमें मातृ प्रेम की अनंत शक्ति की याद दिलाता है। इस दिन का वैधु समय, यानी शाम ५:५३ से ७:०८ तक, विशेष रूप से चाँद की पहली झलक के साथ जुड़ा हुआ है। जब हम इस समय पूजा करते हैं तो ऐसा लगता है कि आध्यात्मिक ऊर्जा हमारे घर में प्रवाहित हो रही है। परम्परागत रूप से यह व्रत केवल पुत्र के लिए माना जाता था, पर अब सभी बच्चों के लिए समान रूप से किया जाता है। यह बदलाव समाज में लिंग‑समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 2025 में अनुमानित 1.2 करोड़ महिलाएँ इस व्रत को रख रही हैं, जो पिछले साल से ७% अधिक है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में इसका विशेष असर देखा जाता है। वैधु समय में दीप जलाकर मंत्र जपना मन को शान्ति देता है और परिवार में सामंजस्य लाता है। कई डॉक्टरों ने उल्लेख किया है कि सही पोषक तत्वों के साथ किया गया व्रत शरीर को डिटॉक्सिफाइ करने में मदद कर सकता है। परंतु दीर्घकालिक उपवास के जोखिम को देखते हुए डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है। सामाजिक रूप से इस पर्व ने कई NGOs को बच्चों के स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के लिए प्रेरित किया है। युवा माँओं ने अपने अनुभव शेयर करके इस व्रत को और भी सुरक्षित बनाने की कोशिश की है। शैक्षणिक संस्थाएँ भी इस अवसर का उपयोग बच्चों में नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए करती हैं। भविष्य में यह पर्व राष्ट्रीय स्तर पर मातृ‑सुरक्षा दिवस के रूप में मान्यता पा सकता है। अंत में, यह याद रखना चाहिए कि आहॉई अष्टमी सिर्फ एक धर्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक बंधनों को मजबूत करने का एक अवसर है।

  • parvez fmp

    अक्तूबर 23, 2025 AT 06:26

    parvez fmp

    भाई वाह 🤩, पूरा इवेंट ठीक से लिखा है, पर थोड़ी शॉर्टकट लग रही है 😂
    लीडिंग टाइम को और सटीक बना सकते हैं।

  • s.v chauhan

    अक्तूबर 25, 2025 AT 14:00

    s.v chauhan

    आहॉई अष्टमी की तैयारियों में समुदाय की भागीदारी देखना बहुत उत्साहजनक है, इससे सामाजिक एकजुटता बढ़ती है और सबको जुड़ाव का अहसास होता है। हमें इस भावना को और भी प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि हर घर में शांति और समृद्धि बनी रहे।

  • abhinav gupta

    अक्तूबर 27, 2025 AT 21:33

    abhinav gupta

    हम्म लेकिन ये सब तो वैधु टाइम की बात है और लोग टाइम देखके ही भजन गाते हैं

  • vinay viswkarma

    अक्तूबर 30, 2025 AT 05:06

    vinay viswkarma

    वास्तव में ये टाइम फिक्स नहीं है बस कहा गया है

  • sanjay sharma

    नवंबर 1, 2025 AT 12:40

    sanjay sharma

    वैधु समय IST में 05:53 से 07:08 बजे है, इसे स्थानीय समय में बदलें।

  • varun spike

    नवंबर 3, 2025 AT 20:13

    varun spike

    यह पर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर आता है, जो शरद ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है।

  • Chandan Pal

    नवंबर 6, 2025 AT 03:46

    Chandan Pal

    मस्त है न 🎉 आहॉई अष्टमी का जोश देखो!

  • SIDDHARTH CHELLADURAI

    नवंबर 8, 2025 AT 11:20

    SIDDHARTH CHELLADURAI

    सबको शुभकामनाएँ 🙏 आहॉई माँ की पूजा में ऊर्जा भरपूर हो

  • Deepak Verma

    नवंबर 10, 2025 AT 18:53

    Deepak Verma

    इतनी जानकारी है, पर कुछ लोग अभी भी नहीं समझते।

  • Gursharn Bhatti

    नवंबर 13, 2025 AT 02:26

    Gursharn Bhatti

    क्या हमने कभी सोचा है कि वैधु समय का चयन कैसे एक ब्रह्मांडीय लय पर आधारित हो सकता है, शायद यह केवल मनुष्य की मनोकामनाओं का प्रतिबिंब है, परंतु यह सिद्धांत विज्ञान भी स्वीकार नहीं करता, फिर भी यह चेतना के विस्तार को दर्शाता है, इसलिए इस समय को केवल समय सारिणी से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक संरेखण से देखना चाहिए, यह विचार हमें गहरी सोच में ले जाता है, और इस प्रकार का विश्लेषण हमारे सांस्कृतिक धरोहर को समझने में मदद करता है।

  • Arindam Roy

    नवंबर 15, 2025 AT 10:00

    Arindam Roy

    लगता है डेटा काफी पुराना है।

  • Ayush Sanu

    नवंबर 17, 2025 AT 17:33

    Ayush Sanu

    उपरोक्त विवरण में सांस्कृतिक प्रसंगों की गहन विश्लेषण साहित्यिक पेशेवरों द्वारा पुनः मूल्यांकन योग्य है।

  • Yogitha Priya

    नवंबर 20, 2025 AT 01:06

    Yogitha Priya

    आहॉई अष्टमी को सिर्फ एक रिवाज नहीं समझना चाहिए, यह माताओं की नैतिक जिम्मेदारी का प्रतिबिंब है, और इस पर आधारित समाज ही सच्चा विकास पाता है।

  • Rajesh kumar

    नवंबर 22, 2025 AT 08:40

    Rajesh kumar

    आहॉई अष्टमी का यह वैधु समय हमारे राष्ट्र की आत्मा को दृढ़ बनाता है, क्योंकि यह मातृ सम्मान को सर्वोच्च स्थान देता है। यह वह अवसर है जब हर भारतीय को एकजुट होकर अपने घरों में पवित्रता का माहौल निर्मित करना चाहिए। हमारी सांस्कृतिक विरासत में यह पर्व अतीत से वर्तमान तक का पुल है, जिससे हमें शौर्य और करुणा दोनों का संदेश मिलता है। इसलिए हमें इस दिन का सही पालन करना चाहिए, न केवल धार्मिक कारणों से बल्कि राष्ट्रीय गर्व के प्रतीक के रूप में। आधुनिक विज्ञान के साथ इस अनुष्ठान को समझना, हमें हमारे अतीत की सच्ची महत्ता पहचानने में मदद करता है। किसी भी आलोचना को केवल प्रयोजनहीन न मानें, क्योंकि यह हमारे धर्म और देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। भले ही कुछ लोग इसे सिर्फ़ एक परम्परा मानें, पर यह हमारे राष्ट्र के वैचारिक सुदृढ़ीकरण का हिस्सा है। आओ हम सभी मिलकर इस अष्टमी को ऐसे मनाएँ जैसे यह हमारे राष्ट्रीय एकता की जड़ें हों। इसे मनाने से न केवल परिवार में शांति आती है, बल्कि समाज में भी सामंजस्य स्थापित होता है। अंत में, याद रखें कि आहॉई अष्टमी का वैधु समय हमारे लिए एक महान अवसर है-अभिमान, सम्मान और सच्चे भारतीय मूल्यों की याद दिलाने का।

  • One You tea

    नवंबर 24, 2025 AT 16:13

    One You tea

    ye tyohaar bilkul best h, sab milke jashn manayein lol

  • Hemakul Pioneers

    नवंबर 26, 2025 AT 23:46

    Hemakul Pioneers

    जीवन के प्रवाह में यह पर्व हमें परस्पर सम्बन्धों की महत्ता याद दिलाता है, इसलिए हम सभी को इसका सम्मान करना चाहिए।

  • Shivam Pandit

    नवंबर 29, 2025 AT 07:20

    Shivam Pandit

    बहुत ही सुंदर विवरण!; शुभकामनाएँ; आपका पोस्ट पढ़कर बहुत प्रेरणा मिली; धन्यवाद;

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