वेतन कैसे समझें: CTC से इन-हैंड तक सटीक जानकारी
कितने लोग अपनी सैलरी देखने के बाद भी असमंजस में रहते हैं? कंपनी का CTC और आपकी बैंक में आने वाली इन‑हैंड सैलरी अक्सर अलग होती है। यहाँ आसान तरीके से समझेंगे कि कौन-सी चीज़ आपकी पर्सनल आमदनी को प्रभावित करती है और क्या आप ज्यादा पैसा घर ले जा सकते हैं।
वेतन की बुनियादी बातें: CTC, इन‑हैंड, और घटक
CTC यानी Cost To Company—कंपनी आपके ऊपर खर्च कितना कर रही है। इसमें बेस सैलरी, एचआरए (HRA), महंगाई भत्ता (DA), बोनस, और नियोक्ता का PF योगदान शामिल होता है। इन‑हैंड सैलरी वही रकम है जो बैंक खाते में रह जाती है, यानी CTC से कटे हुए टैक्स, कर्मचारी का PF, प्रोफ़ेशनल टैक्स और अन्य कटौतियाँ निकालने के बाद।
बेस सैलरी पर आपका टैक्स और PF बेस पर निर्भर करता है। HRA का क्लेम अगर आपका किराया है तो भाड़े के बिल और किरायेदारी की रसीद से कर‑छूट मिल सकती है। LTA, Mediclaim और बोनस भी सालाना इनकम‑टैक्स को प्रभावित करते हैं।
इंटरनेट पर Payslip पढ़ना और गणना कैसे करें
पे‑स्लिप पर 'Gross Salary' और 'Net Salary' देखें। ग्रॉस सैलरी में सभी भत्ते होते हैं; नेट सैलरी में कटौतियाँ कम कर के दिखती हैं। साधारण गणना: इन‑हैंड = ग्रॉस - (इनकम टैक्स + कर्मचारी PF + अन्य कटौतियाँ)। साल भर के लिए टैक्स बचाने के वैध विकल्प जैसे 80C (PF, PPF, ELSS), और HRA क्लेम को समझें।
अगर आपको लगता है कि आपकी कटौती ज्यादा हो रही है, HR से साफ़‑साफ़ पूछें और पे‑स्लिप की हर लाइन समझें। कई बार नोटऑनली ग्रॉस में कुछ वेतन घटक कैटेगरी की वजह से टैक्सेबल होते हैं।
सरकारी नौकरियों में पे‑स्केल और ग्रेड पे अलग होते हैं; पेंशन, DA और टियर‑आधारित लाभ मिलते हैं। प्राइवेट सेक्टर में CTC में फ्लेक्सिबल बेनिफिट्स और variable pay आम है।
वेतन बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके
1) प्रदर्शन दिखाइए: measurable परिणाम, प्रोजेक्ट्स और मार्केटिंग/बिक्री नंबर बताइए। 2) सैलरी नेगोशिएशन के समय CTC नहीं, इन‑हैंड और प्रमोशन पैथ पर बात करें। 3) स्किल अपग्रेड करें—प्रमाणिक कोर्स और सर्टिफिकेट से मांग बढ़ती है। 4) कंपनी की पॉलिसी जानिए—बोनस, इन्क्रिमेंट साइकल और प्रोमोशन टाइमलाइन से आपको सही समय पर नेगोशिएट करने में मदद मिलेगी।
छोटी चालें भी असर दिखाती हैं: HRA का सही क्लेम करिए, टैक्स सेविंग निवेश तय करिए, और अनावश्यक कटौतियाँ जैसे गलत फ़ोन/बिलिंग क्लेम HR से चेक कराइए।
अगर बढ़ोतरी नहीं मिल रही तो मार्केट में अपनी वैल्यू जाँचें—नए जॉब की जॉब‑प्रपोजल अक्सर बेहतर पैकेज देती है। लेकिन केवल पैसों के बारे में मत सोचिए; जॉब सैटिस्फैक्शन, सीखने के मौके और कलियर ग्रोथ भी मायने रखते हैं।
छोटी‑छोटी समझदारी और समय पर नेगोशिएशन से आपकी इन‑हैंड सैलरी में अच्छा फर्क आ सकता है। अपनी पे‑स्लिप समझें, टैक्स प्लानिंग करें और रिज़्युमे में नापी‑तौली उपलब्धियाँ दिखाइए—पैसा खुद पीछे आएगा।
मुकेश अंबानी चौथे साल भी बिना वेतन के : नज़रों में यहां से लेकर आगे तक
रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने चौथे साल भी कोई वेतन नहीं लिया है। उनकी यह रणनीति कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई थी। इस अवधि में, अंबानी ने न केवल अपना वेतन त्यागा, बल्कि अन्य भत्तों, सेवानिवृत्ति लाभों और कमीशन का भी परित्याग किया। उनकी तीनों संतानें कंपनी के बोर्ड में बैठीं और बैठकों के लिए फीस और कमीशन प्राप्त किया।