शेयर बाजार गिरावट: तुरंत क्या करें और कैसे समझें

जब शेयर बाजार गिरता है तो घबराहट स्वाभाविक है। पर क्या आप जानते हैं कि हर गिरावट मौके भी ला सकती है? पहले यह समझ लें कि गिरावट अस्थायी है या बड़ी वजहों से आई है। यही फैसला आपका अगला कदम तय करेगा।

गिरावट के सामान्य कारण

सबसे पहले कारण जानना जरूरी है। कुछ आम वजहें ये हैं: वैश्विक अर्थव्यवस्था में कमजोरी, बैंकिंग या वित्तीय कंपनियों की खराब रिपोर्ट, सरकारी नीतियों में अचानक बदलाव, विदेशी निवेशकों (FII) का बहिर्वाह, और अस्थिर कॉरपोरेट नतीजे। कभी-कभी तकनीकी कारण जैसे बड़ी मात्रा में बिकवाली या अल्गोरिदमिक ट्रेडिंग भी तेज गिरावट ला देती है।

कुछ घटनाएँ स्थानीय भी हो सकती हैं — जैसे किसी बड़े समूह के शेयरों में तेज गिरावट (उदाहरण: किसी समय अडानी समूह के शेयरों में उतार-चढ़ाव ने पूरा बाजार प्रभावित किया था)। इसलिए खबरों और कंपनी रिपोर्ट्स पर नजर रखें, पर अफवाहों पर तुरन्त प्रतिक्रिया न दें।

तुरंत करने वाले व्यावहारिक कदम

गिरावट के समय यह तय कर लें कि आप निवेशक किस तरह के हैं — लंबी अवधि के लिए या शॉर्ट टर्म ट्रेडर। आपके कदम उसी पर निर्भर होंगे।

1) शांत रहें: भावनाओं में आकर बेचने से नुकसान पक्का हो सकता है। पहली चीज यह है कि घबराहट को रोकें और पूरे पोर्टफोलियो का ठंडे दिमाग से आकलन करें।

2) पोर्टफोलियो चेक करें: कौन से शेयर अस्थायी समस्या से जूझ रहे हैं और कौन से कंपनी मूलभूत रूप से कमजोर हैं? मजबूत बिजनेस मॉडल और अच्छा बैलेंस शीट रखने वाली कंपनियों को अक्सर गिरावट के बाद सही करेक्शन मिलता है।

3) जोखिम कम करें: अगर आपने लीवरेज या मार्जिन पर खरीदारी की है, तो उसे तुरंत संभालें। मार्जिन कॉल्स बड़े नुकसान करवा सकती हैं।

4) मौका देखें: SIP निवेश करने वाले लोग गिरावट को अमूमन खरीद का अवसर मानते हैं। अगर आपके पास इक्विटी खरीदने की क्षमता और धैर्य है, तो डायवर्सिफाइड फंड या ब्लू-चिप शेयरों में धीरे-धीरे निवेश कर सकते हैं।

5) स्टॉप-लॉस और लक्ष्य तय करें: ट्रेडर्स के लिए स्टॉप-लॉस जरूरी है। लॉन्ग-टर्म निवेशक के लिए भी exit plan होना चाहिए—कब बिकना है और कब धैर्य रखना है, यह पहले से तय करें।

6) खबरें और आंकड़े देखें: GDP, मुद्रास्फीति, RBI नीतियाँ, और कॉरपोरेट परिणाम बाजार के मूड को बदलते हैं। फंड फ्लो रिपोर्ट (FII/DII) भी मदद करती है समझने में कि बड़े निवेशक क्या कर रहे हैं।

7) स्थानीय संदर्भ याद रखें: मालदा जैसे इलाके के छोटे निवेशक अक्सर स्थानीय आर्थिक खबरों पर असर देखते हैं—किसान, व्यापार और नौकरी की स्थितियों का असर भी शेयरपर नहीं लेकिन आर्थिक धारणा पर पड़ता है।

अंत में, बाजार गिरना सामान्य है। स्मार्ट निवेशक वही है जो डर के समय योजना बनाता है, जोखिम संभालता है और अवसर पहचानता है। अगर सुनिश्चित नहीं हैं तो एक भरोसेमंद वित्तीय सलाहकार से बात कर लें—छोटे फैसले बिना योजना के लेने से बचें।

Nikkei 225 में रिकॉर्ड 12.4% गिरावट, जापान का शेयर बाजार 1987 के बाद सबसे बड़ी गिरावट के बाद उथल-पुथल में 17 जून 2025

Nikkei 225 में रिकॉर्ड 12.4% गिरावट, जापान का शेयर बाजार 1987 के बाद सबसे बड़ी गिरावट के बाद उथल-पुथल में

John David 0 टिप्पणि

जापान के प्रमुख शेयर सूचकांक निक्केई 225 में 12.4% की ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिली, जो 1987 के बाद सबसे बड़ी है। इसकी वजह अमेरिकी मंदी की आशंका और येन की मजबूती रही। इस गिरावट से 2024 की सारी कमाई मिट गई और वैश्विक बाजार भी दबाव में आ गए।