राजकोषीय संघवाद: केंद्र, राज्य और पैसों की व्यवस्थापन कला

क्या आपने सोचा है कि आपकी स्कूली ट्यूशन या स्थानीय सड़क किसके पैसों से बनती है? यही प्रश्न राजकोषीय संघवाद (fiscal federalism) पूछता है — कौन कर वसूल करे, कितना केंद्र रखे और कितना राज्य को दे। यह सिर्फ तकनीकी मसला नहीं; यह रोज़मर्रा की सुविधाओं और विकास पर सीधे असर डालता है।

सरल शब्दों में, राजकोषीय संघवाद तीन सवालों का जवाब देता है: कौन-कौन से कर कौन लेगा, केंद्र से राज्यों को किस तरह रकम मिलेगी (टे्रन्सफर), और राज्यों की खर्च करने की जिम्मेदारी क्या है। इन फैसलों से शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और कृषि जैसी सेवाओं की गुणवत्ता तय होती है।

भारत में कैसे काम करता है?

भारत में वित्त आयोग मुख्य भूमिका निभाता है — हर पांच साल पर यह तय करता है कि केंद्र की आय का कितना हिस्सा राज्यों में जाए। GST ने कुछ टैक्सों को बीच से हटा दिया, पर केंद्र-राज्य फंड फ्लो और अनुदान आज भी अहम हैं। केंद्र-सरकार कई बार योजनाएं चलाती है और पैसा देती है (Centrally Sponsored Schemes), जिनका नियंत्रण और शर्तें राज्यों पर असर डालती हैं।

एक और पहलू है ‘वर्टिकल’ और ‘हॉरिज़ॉन्टल’ असंतुलन। वर्टिकल का मतलब है केंद्र और सभी राज्यों के बीच राजस्व का फर्क; हॉरिज़ॉन्टल मतलब है अलग-अलग राज्यों के बीच क्षमता और जरूरतों का अंतर—गरीब राज्य ज्यादा मदद माँगते हैं। यही वजह है कि वित्त आयोग और अनुदान नीतियाँ महत्वपूर्ण हैं।

नागरिकों और नीतिनिर्माताओं के लिए क्या जाना जरूरी है

अगर आप नागरिक हैं, तो इन बातों पर नजर रखें: राज्य का कुल कर्ज, राजस्व घाटा, अपने-हाथ के कर (जैसे स्टेट GST के हिस्से या प्रॉपर्टी टैक्स) और केंद्र से मिलने वाले ट्रांसफर। इन आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य कितनी सेवा दे पाएगा और टैक्स दबाव क्या होगा।

नीतिनिर्माताओं के लिए व्यवहारिक सुझाव: 1) राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता दें—छोटी-सी फैसला क्षमता स्थानीय समस्याओं का जल्दी समाधान करती है; 2) अनुदानों को लक्ष्यीकरण के साथ दें ताकि धन का दुरुपयोग कम हो; 3) कर बेस और संग्रह क्षमता बढ़ाएँ—GST के बाद भी कई राज्यों की अपनी टैक्स क्षमता सीमित है; 4) पारदर्शिता बढ़ाएँ—बजट और ऋण की रिपोर्ट समय पर सार्वजनिक करें।

अंत में, राजकोषीय संघवाद केवल अर्थशास्त्र की किताबों का विषय नहीं है। यह इस बात का भी आधार है कि स्कूल, अस्पताल और सड़कें कितनी तेज़ी से बनेंगी। जब केंद्र और राज्य स्पष्ट नियमों और जिम्मेदारियों के साथ पैसा बाँटते हैं, तो विकास की दिशा तेज और टिकाऊ होती है। इसलिए बजट और वित्त आयोग की सिफारिशें पढ़ना और समझना हर जागरूक नागरिक के लिए उपयोगी है।

कर्नाटक के साथ कर वितरण में अन्याय: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की चिंता 1 नवंबर 2024

कर्नाटक के साथ कर वितरण में अन्याय: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की चिंता

John David 0 टिप्पणि

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा कर वितरण में राज्य के साथ अन्याय किया जा रहा है। उनका कहना है कि राज्य का महत्वपूर्ण योगदान होने के बावजूद इसे कम आवंटन मिल रहा है, जिससे आर्थिक रूप से उन्नत राज्यों की राजकोषीय स्वायत्तता पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर अन्य राज्यों के साथ मिलकर चर्चा करने के लिए एक सम्मेलन बुलाया है।