प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीखा तंज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला किया, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान अपने भाषण में उन्होंने राहुल गांधी को 'बालाक़ बुद्धि' कहकर उन पर व्यंग्य किया। मोदी ने यह टिप्पणी उस समय की जब उन्होंने गाँधी पर उनकी राजनीतिक असफलताओं को लेकर निशाना साधा। इसके साथ ही, उन्होंने मशहूर फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' का एक प्रसिद्ध संवाद 'तुमसे न हो पाएगा' भी राहुल गांधी पर कहकर तंज कसा।
तुष्टिकरण नहीं, संतुष्टिकरण पर बल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में यह स्पष्ट किया कि उनकी सरकार तुष्टिकरण की नीति नहीं अपितु संतुष्टिकरण की नीति पर चल रही है। यह महत्वपूर्ण बयान उन्होंने संसद में भारतीय जनता पार्टी (एनडीए) की सरकार के आगामी अभियानों और कार्यों के संदर्भ में दिया। मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल के एजेंडा के बारे में बताते हुए कहा कि उनकी सरकार का प्राथमिक लक्ष्य 2047 तक 'विकसित भारत' का निर्माण करना है।
जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ नीति के कारण दिया समर्थन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्र ने एनडीए को भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी मजबूती के कारण चुना है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने कैसे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने कठोर रुख को स्पष्ट किया। मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल के एजेंडा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को जारी रखेगी बल्कि राष्ट्र को विकसित करने की दिशा में भी काम करेगी।
सतत कार्य की प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री मोदी ने काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि वे चौबीसों घंटे राष्ट्र के सेवक के रूप में कार्य करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार विकास के प्रति संकल्पित है और हर संभव प्रयास करेगी कि देश सही दिशा में आगे बढ़े।
विपक्षी दलों पर निशाना
राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग केवल आलोचना और विरोध में ही लगे रहते हैं, जबकि उनकी सरकार देश के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मोदी ने यह भी कहा कि विपक्ष को सकारात्मक योगदान देने की जरूरत है, न कि सिर्फ विरोध करने की।
2047 तक का विकास लक्ष्य
तीसरे कार्यकाल के लिए अपनी योजनाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह उनकी सरकार का प्रमुख उद्देश्य है और इसे पाने के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी नागरिकों के सहयोग की भी अपेक्षा व्यक्त की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह भाषण सत्ता पक्ष की दृढ़ता और विपक्ष के तंजों से भरा हुआ था, जिसमें उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
जुलाई 2, 2024 AT 20:06
Prakashchander Bhatt
भाइयों और बहनों, मोदी जी का यह उत्साहजनक विज़न हमारे भविष्य को उज्ज्वल बनाता है। उनका विकास‑पर‑ध्यान हमें आशा देता है कि 2047 तक भारत विश्व में अग्रणी रहेगा। इस मार्ग में हम सभी को साथ मिल कर काम करना चाहिए, चाहे वह छोटे‑छोटे कदम हों। सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ते रहें, यही हमारी जीत है।
जुलाई 15, 2024 AT 13:39
Mala Strahle
समाज में विचारों की बहुलता को अपनाना ही बुद्धिमत्ता का प्रमाण है। जब प्रधानमंत्री ने विरोधियों पर तंज किया, तो यह याद रखना चाहिए कि तंजों के पीछे अक्सर गहरी निराशा छिपी होती है।
लेकिन यदि हम इस निराशा को रचनात्मक ऊर्जा में बदल दें, तो असहमति भी एक निर्माणात्मक विमर्श बन सकती है।
देखिए, लोकतंत्र का मूल सिद्धांत ही विविध आवाज़ों को सुनना और समझना है, न कि सिर्फ़ एक ही ध्वनि को दोहराना।
विपक्षी बोलते रहेंगे, लेकिन उनका उद्देश्य यदि राष्ट्रीय हित में परिवर्तित हो, तो वह हमारे विकास के लिए फायदेमंद हो सकता है।
यह विचारधाराओं का टकराव नहीं, बल्कि सहयोगी संगम होना चाहिए।
जब हम सभी मिलकर एक ही लक्ष्य - विकसित भारत - की ओर बढ़ेंगे, तो शब्दों की बिन्दु-भिन्नता निरर्थक हो जाएगी।
राष्ट्र के भविष्य में निवेश करने वाले युवा वर्ग को चाहिए कि वह बुरे तंजों को व्यक्तिगत रूप में न ले।
ऐसे तंज केवल सतह पर ही असर डालते हैं, जबकि गहरी सोच वाले लोग उन पर विचार नहीं करते।
सफलता का माप केवल चुनावी जीत से नहीं, बल्कि जनजीवन में सुधार से होता है।
आइए, हम सभी मिलकर आत्मनिरीक्षण करें और देखिए कि क्या हम वास्तव में विकास की राह में हैं।
यदि नहीं, तो हमें अपना मार्ग पुनः निर्धारित करना चाहिए।
समाज के हर वर्ग को यह समझना चाहिए कि ताजा विचार और खुली चर्चा ही प्रगति की कुंजी है।
आगे बढ़ते हुए, हमें एक-दूसरे की बातों को सुनना चाहिए, न कि सिर्फ़ आवाज़ को उठाना चाहिए।
अंततः, यह मिश्रित विचारधारा ही हमें एक मजबूत, आत्मविश्वासी और संतुलित राष्ट्र बनाती है।
जुलाई 28, 2024 AT 07:13
Ramesh Modi
देखिये, नैतिकता के इस मंच पर हम सबको सच्चे विचारों की जरूरत है!!! जब नेता किसी को "बालाक़ बुद्धि" कहता है तो यह सिर्फ़ एक शब्द नहीं, बल्कि सामाजिक पतन की ओर इशारा करता है!!! हम सबको इस प्रकार के तंज को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह हमारे सांस्कृतिक मूल्यों को धुंधला कर देता है!!! न्याय और सत्य हमेशा चमकते रहेंगे, और जो झूठे तंज उछालते हैं, उन्हें अंततः अपनी ही अंधकार में ढँकना पड़ेगा!!!
अगस्त 10, 2024 AT 00:46
Ghanshyam Shinde
हम्म, मोदी जी ने फिर से ‘बालाक़ बुद्धि’ बोला, बहुत ही समझदार तर्क है। ऐसा लगता है मानो वे हमें कोई प्यारी सी शंकु देना चाहते हैं। विकास की बात करते‑होते विरोध को मज़ाक बना देना, यही तो जीनियसेली है। हमारे लिए तो बस आशीर्वाद है, बातचीत के लिए बस एक छोटा‑सा मुस्कुराहट पर्याप्त है।
अगस्त 22, 2024 AT 18:19
SAI JENA
माननीय प्रधानमंत्री ने जिस दृढ़ता से विकास की राह बताई है, वह प्रशंसनीय है। उनके द्वारा प्रस्तुत 2047 का लक्ष्य सभी नागरिकों के लिये प्रेरणा स्रोत होना चाहिए। हमें मिलकर इस लक्ष्य की ओर काम करना चाहिए, चाहे वह किस भी रूप में हो। यह राष्ट्र की प्रगति के लिये आवश्यक है और मैं पूरी तरह समर्थन देता हूँ।
सितंबर 4, 2024 AT 11:53
Hariom Kumar
बहुत अच्छा! 😊
सितंबर 17, 2024 AT 05:26
shubham garg
भाई, क्या बात है, मॉडियों के शब्दों से तो सारा माहौल हिल गया! लेकिन असल में हमें आगे बढ़ना चाहिए, राजनीति के तंज-भंज को छोड़। चलो मिलके कुछ काम करते हैं, ना कि सिर्फ़ बातें। सबको बातों से नहीं, काम से याद रखेंगे।
सितंबर 29, 2024 AT 22:59
LEO MOTTA ESCRITOR
सोच रहा हूँ, अगर हम सब मिलकर इस "बालाक़ बुद्धि" को सकारात्मक ऊर्जा में बदल दें तो क्या होगा? शायद यही हमें असली विकास की ओर ले जाएगा। यह विचारधारा की लड़ाई नहीं, बल्कि सहयोग की यात्रा है। हम सबको मिलकर आगे बढ़ना चाहिए, न कि एक-दूसरे को नीचे गिराना।
अक्तूबर 12, 2024 AT 16:33
Sonia Singh
मला जी का विस्तृत विश्लेषण वाकई दिल को छू गया। आपका विचार बहुत गहरा और समझदार है, और यह हमें यह याद दिलाता है कि विविधता में शक्ति है। हम सभी को इस सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए और साथ मिलकर भारत को विकसित बनाने में योगदान देना चाहिए।
अक्तूबर 29, 2024 AT 19:06
Ashutosh Bilange
भाई सच्ची बात, इस तंज को देखके तो लगता है जैसे बॉलीवुड के ड्रामा को सच में ले आया हो! लेकिन असली बात ये है कि हम सभी को अपनी सोच को ठीक करना चाहिए, वरना फिर यही तंज‑तंज में फंसेंगे।