वित्तीय बाजार: शेयर, IPO और RBI के निर्णयों का पूरा असर
वित्तीय बाजार वो जगह है जहाँ वित्तीय बाजार, भारत और दुनिया भर के पैसे, शेयर, ऋण और निवेश का आदान-प्रदान होता है चलता है। ये बाजार केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं, बल्कि बैंक, IPO, ऋण, और मुद्रा बाजार तक फैला हुआ है। जब RBI रेपो दर बदलता है, तो ये बदलाव सीधे आपके लोन और बचत पर असर करता है। जब कोई कंपनी जैसे ग्रोउ, एक भारतीय टेक स्टार्टअप जिसने अपने आईपीओ के बाद मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹1.04 लाख करोड़ पार किया IPO लाती है, तो उसकी कीमत का उछाल पूरे बाजार के भावों को बदल देता है। इसी तरह, Yes Bank, एक प्रमुख निजी क्षेत्र का बैंक जिसने 16,000 करोड़ रुपये की फंड रेजिंग की का शेयर 8% बढ़ना भी वित्तीय बाजार के अंदरूनी ताकत का हिस्सा है।
इस बाजार में कोई भी निर्णय छोटा नहीं होता। RBI का फैसला कि रेपो दर 5.50% पर रुके, या जीडीपी बढ़ोतरी 6.8% तक बढ़ा दी जाए, वो सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों निवेशकों के फैसले बदल देता है। जब Midwest Limited, एक ग्रेनाइट कंपनी जिसने ब्लैक गैलेक्सी ग्रेनाइट IPO में ₹451 करोड़ जुटाए ने अपना IPO लॉन्च किया, तो विशेषज्ञों ने इसकी कीमत पर चेतावनी जारी की — ये भी वित्तीय बाजार का हिस्सा है। यहाँ निवेश करने वाले सिर्फ शेयर खरीदते नहीं, बल्कि बाजार के तरीके, कंपनियों की वित्तीय स्थिति, और सरकारी नीतियों को समझते हैं। अगर आप देखें, तो ग्रोउ के संस्थापक ललित केशरे का अरबपति बनना, Yes Bank का फंड रेजिंग, या Midwest Limited का मूल्यांकन — सब कुछ एक ही बाजार के अलग-अलग हिस्से हैं।
ये वित्तीय बाजार आपके घर के बजट से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक का हिस्सा है। जब आपका बैंक अवकाश कैलेंडर जारी करता है, तो वो भी इसी बाजार की गतिविधि का हिस्सा है। यहाँ आपको शेयरों के उछाल, आईपीओ के रिजल्ट, RBI के फैसले, और कंपनियों के वित्तीय आंकड़े मिलेंगे — सब कुछ एक जगह, सीधे और सटीक। नीचे दिए गए पोस्ट्स में आप देखेंगे कि कैसे एक छोटी सी खबर बड़े बाजार को हिला देती है।
उत्तर प्रदेश में सोने की कीमतें तेजी से बढ़ीं: 24 कैरेट सोना ₹11,825 प्रति ग्राम, ग्लोबल मार्केट के असर में
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